जागो बहुजनों जागो कब तक अपने पूर्वजों के संघर्षों से अनिभिज्ञ रहोगे…..महात्मा ज्योतिबा फुले

By | April 12, 2018

11 अप्रैल,1827 इतिहास के पन्नों से
वो थी इसलिए आज हम है महात्मा ज्योतिबा फुले

जागो बहुजनों जागो कब तक अपने पूर्वजों के संघर्षों से अनिभिज्ञ रहोगे…..

11 अप्रैल,1827 इतिहास के पन्नों से
वो थी इसलिए आज हम है

भारत के शोषितों वंचितों पिछड़ों, महिलाओं में शिक्षा अलख जगाने वाले सामाजिक क्रांति के पुरोधा , महामानव सामाजिक क्रांतिकारी, राष्ट्रपिता, बहुजन महानायक,माली समाज के सम्मान के प्रतीक
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महामानव,महात्मा ज्योतिबा फुले जी की 191 वें जन्मदिवस पर लख लख बधाइयां और मंगलकामनाएं

महात्मा ज्योतिबा फुले जी ऐसे योद्धा, महामानव का नाम है! जिन्होंने शोषण के विरुद्ध आवाज बुलंद की उपेक्षितों को उनका हक दिलाने के लिए जीवन समर्पित कर दिया।
ऐसे महापुरुष महामानव के चरणों में श्रद्धा के सुमन अर्पित करता हूं!
जातिगत भेदभाव पांखडवाद को बढाने वालों के खिलाफ
वास्तविक और ठोस लड़ाई छेड़ने वालों में महात्मा का उल्लेखनीय नाम है!

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शोषित समाज को जागृत करने में उनके योगदान को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा।
जागो बहुजनों जागो अपने पूर्वजों के संघर्षों से कुछ तो सीखो
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 महामानव महात्मा ज्योतिबा फुले जी का जीवन परिचय -:

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बहुजनों के इस अप्रितम योद्धा, क्रांतिकारी लेखक, प्रकाशकऔर मनुवाद के विरुद्ध विद्रोही चेतना के प्रखर नायक
महामानव महात्मा ज्योतिबा फुले जी का जन्म 11 अप्रैल 1827 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के माली जाति के परिवार में हुआ था.।

महात्मा ज्योतिबा फुले

2)महात्मा ज्योतिबा फुले जी के पिता का नाम गोविन्द राव और माता का नाम चिमनबाई था! ज्योतिबा जी के बड़े भाई का नाम राजाराम था| पूना के आस-पास माली जाति के लोगों को फुले (फूल वाले) कहा जाता है| ज्योतिराव फुले की माता चिमनाबाई का निधन उस समय हो गया जब वे मात्र एक वर्ष के थे| अब उनके पिता जी के सामने ज्योतिबा के पालन-पोषण की चिंता थी । उन्होंने उनके लिए एक धाय को नौकर रखा लेकिन दूसरी शादी नहीं की | उस धाय ने भी एक माता के समान ज्योतिबा का पालन-पोषण किया |
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महात्मा ज्योतिबा फुले

ज्योतिबा बहुत बुद्धिमान थे। उन्होंने मराठी में अध्ययन किया। वे महान क्रांतिकारी, भारतीय विचारक, समाजसेवी, लेखक एवं दार्शनिक थे। 1840 में ज्योतिबा का विवाह माता सावित्रीबाई से हुआ था।
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19वीं सदी के एक महान भारतीय विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। इन्हें ‘महात्मा फुले’ एवं ‘ज्‍योतिबा फुले’ के नाम से भी जाना जाता है।
ज्योतिबा जी महाराष्ट्र के पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने शिवाजी के पराक्रम, साहस और कुशलता पर गीत लिखे | उन्होंने शिवाजी के महान आदर्शों का वर्णन किया।

महात्मा ज्योतिबा फुले

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महाराष्ट्र के समाज सुधारकों महात्मा ज्योतिबा फुले
में सर्वाधिक आक्रामक, प्रतिभा संपन्न और विद्रोही व्यक्तित्व महात्मा ज्योतिबा फुले भारतीय सामाजिक क्रांति के जनक कहलाते हैं.

शिक्षा के असली प्रचारक ज्योतिराव फूले जी थे! और प्रथम महिला शिक्षा का विद्यालय की स्थापना फुले साहब की ही देन है।

महात्मा ज्योतिबा फुले जी ने 1848 मेँ भारत का प्रथम स्कूल खोला,
तब तक तो बॉम्बे हाई स्कूल भी नहीँ खुला था। उन्होंने लड़कियोँ को पढाने के लिये कुल तीन स्कूल खोले!

महात्मा ज्योतिबा फुले जी को अपने स्कूल में जब लड़कियोँ को पढाने के लिये महिला टीचर (शिक्षिका) तक नहीँ मिली,

तब उन्होनेँ अपनी पत्नि सावित्री बाई को शिक्षण के लिये तैयार किया।

महात्मा ज्योतिबा फुले

1853 में महात्मा ज्योतिराव फुले जी और उनकी पत्नी सावित्री बाई ने अपने मकान में प्रौढ़ों के लिए रात्रि पाठशाला खोली!
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महात्मा ज्योतिबा फुले जी ने आज से 150 साल पहले ‘कृषि विद्यालय’ की बात उठायी ये वो समय था, जबकि किसानों की दुर्दशा पर कोई समाज सुधारक बोलते नहीँ थे!!
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1 जनवरी 1848 से लेकर 15 मार्च 1852 के दौरान सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा फुले ने बिना किसी आर्थिक मदद और सहारे के लड़कियों के लिए 18 विद्यालय खोले। उस दौर में ऐसा सामाजिक क्रांतिकारी की पहल पहले किसी ने नही की थी। इन शिक्षा केन्द्र में से एक 1849 में पूना में ही उस्मान शेख के घर पर मुस्लिम स्त्रियों व बच्चों के लिए खोला था।
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महात्मा ज्योतिबा फुले

महात्मा ज्योतिबा फुले एवं माता सावित्रीबाई अपने विद्यार्थियों से कहा करतें थे! कि “कड़ी मेहनत करो, अच्छे से पढ़ाई करो और अच्छा काम करो”। ब्रिटिश सरकार के शिक्षा विभाग ने शिक्षा के क्षेत्र में सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा फुले के योगदान को देखते हुए 16 नवम्बर 1852 को उन्हें शॉल भेंटकर सम्मानित किया।
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माता सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा ने अपने घर के भीतर पानी के भंडार को दलित समुदाय के लिए खोल दिया! सावित्रीबाई फुले के भाई ने इन सब के लिए ज्योतिबा की घोर निंदा की,

इस पर सावित्रीबाई ने उन्हें पत्र लिख कर अपने पति के कार्यो पर गर्व किया और उन्हें महान कहा।

महात्मा ज्योतिबा फुले

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माता सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा ने 24 सितम्बर,1873 को सत्यशोधक समाज की स्थापना की। सावित्रीबाई फुले ने विधवा विवाह की परंपरा शुरू की और सत्यशोधक समाज द्वारा पहला विधवा पुनर्विवाह 25 दिसम्बर 1873 को संपन्न किया गया था और यह शादी बाजूबाई निम्बंकर की पुत्री राधा और सीताराम जबाजी आल्हट की शादी थी। 1876 व 1879 में पूना में अकाल पड़ा था तब ‘सत्यशोधक समाज‘ ने आश्रम में रहने वाले 2000 बच्चों और गरीब जरूरतमंद लोगों के लिये मुफ्त भोजन की व्यवस्था की।
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अपने जी

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